Business Management

प्रबन्ध विचारधारा के विकास में टेलर एवं फेयोल की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

टेलर एवं हेनरी फेयोल के विचारों का तुलनात्मक अध्ययन (Comparative Study of Taylor and Fayol’s Views )

यद्यपि टेलर तथा फेयोल दोनों ही प्रवर्तकों (Pioneers) ने अपने-अपने योगदान से प्रबन्ध विज्ञान को सुदृढ़ बनाने का प्रयास किया है, किन्तु सूक्ष्म दृष्टि से अध्ययन करने से पता चलता है कि अपनी जीवन स्थितियों में अन्तर होने के कारण टेलर ने प्रबन्ध विज्ञान का अध्ययन फोरमैन की दृष्टि से किया जबकि फेयोल ने एक सर्वोच्च प्रशासक के रूप में इसी आधार पर टेलर को ‘कुशलता विशेषज्ञ’ (Efficiency Expert) और फेयोल को ‘प्रशासन विशेषज्ञ’ (Administration Expert) कहा जाता है।

दोनों प्रबन्ध विशेषज्ञों के प्रबन्ध जगत में दिए गए योगदान में कुछ समानताएँ और कुछ असमानताएँ हैं, जिन्हें निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है

टेलर एवं फेयोल के विचारों में समानताएँ-

टेलर एवं हेनरी फेयोल के विचार निम्न मामलों में एक समान थे

1. दोनों ने ही प्रबन्ध के संबंध में मानवतावादी दृष्टिकोण को प्रधानता दी थी।

2. टेलर एवं हेनरी फेयोल दोनों ने ही प्रबन्ध में नियोजन के महत्व पर जोर दिया।

3. टेलर एवं फेयोल दोनों ही प्रबन्ध व प्रशासन की दशाओं में सुधार लाना चाहते थे।

4. दोनों की यह धारणा थी कि प्रबन्ध एक अर्जित प्रक्रिया है तथा उपयुक्त प्रशिक्षण व निरीक्षण द्वारा इसका विकास किया जा सकता है।

5. इन दोनों विद्वानों ने प्रबन्ध के तकनीकी व पेशा पहलू पर जोर दिया।

6. यह दोनों विद्वान प्रबन्ध को एक रचनात्मक आधार प्रदान करना चाहते थे और इसके लिए टेलर ने वैज्ञानिक प्रबन्ध को अपनाया और फेयोल ने प्रशासन के सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया।

7. दोनों का यह मत था कि यदि स्वामी एवं श्रमिकों में अच्छे सम्बन्ध स्थापित हो जायें तो उद्देश्यों को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

टेलर एवं फेयोल के विचारों में असमानताएँ।

टेलर एवं फेयोल के विचारों में निम्न मामलों में असमानताएँ थी 1. टेलर के विचार सैद्धान्तिक अधिक थे, जबकि फेयोल के विचार व्यावहारिक अधिक थे।

2. टेलर ने व्यक्तिगत श्रमिक पर ध्यान दिया व्यक्तियों के समूह पर नहीं; जबकि फेयोल ने व्यक्तियों के समूह पर अधिक ध्यान दिया।

3. टेलर ने कारखाने के प्रबन्ध तथा उत्पादन के इंजीनियरिंग पक्ष पर अधिक जोर दिया; लेकिन फेयोल ने प्रशासन के कार्यों पर अपना ध्यान केन्द्रित किया।

4. टेलर ने अपने विचारों में यह बताया कि क्रियात्मक संगठन के द्वारा श्रमिकों की कार्यकुशलता में वृद्धि की जानी चाहिए जबकि फेयोल ने प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशासन के सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया।

5. टेलर ने श्रमिकों की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए विज्ञान के प्रयोग को प्रोत्साहन दिया जबकि फेयोल ने प्रमुख प्रबन्धक के कार्यों की दृष्टि से प्रबन्ध विज्ञान के सामान्य सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया।

6. टेलर अमरीकन प्रबन्ध विशेषज्ञ या जबकि फेयोल फ्रांसीसी दोनों पर अपनी-अपनी 1 परिस्थितियों का प्रभाव पड़ा।

7. टेलर वैज्ञानिक प्रबन्ध स्कूल के समर्थक थे जबकि फेयोल व्यवहार स्कूल के। 8. टेलर के अध्ययन का केन्द्र बिन्दु श्रमिक था; लेकिन फेयोल के अध्ययन का केन्द्र बिन्दु प्रबन्धक या प्रशासन था। निष्कर्ष (Conclusion) उपरोक्त दोनों के विचारों के सम्बन्ध में उर्विक ने कहा है कि, “टेलर तथा फेयोल के कार्य काफ सीमा तक एक-दूसरे के पूरक थे। दोनों ने ही यह अनुभव किया कि प्रबन्ध के समस्त स्तरों पर कर्मचारियों तथा उनके प्रबन्ध की समस्या औद्योगिक सफलता की आधारशिला है। इस समस्या के समाधान हेतु दोनों ने ही वैज्ञानिक विधियों के उपयोग पर बल दिया।

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